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पोचमपल्ली’ गाँव (रेशमी साड़ियों का भंडार)

  पोचमपल्ली ’ गाँव (रेशमी साड़ियों का भंडार)   पर्यटन अथवा देशाटन मानव की स्वाभाविक प्रवृति होती है। इसका उद्देश्य सिर्फ मानसिक शांति अथवा मनोरंजन ही नहीं है, बल्कि लोग आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षिणक लाभ के उद्देश्य से भी देश-देशान्तरों की यात्रा करते हैं। यही कारण है कि आधुनिक युग में यह एक संपूर्ण उद्योग का रूप ले चुका है। तमाम ऐसे जगह हैं जिन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों से बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है |ऐसे में, जब इन पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है तो इनके विकास की गति भी तीव्र हो जाती है। इसी क्रम में, हाल ही में तेलंगाना में हैदराबाद से तकरीबन 45 किमी दूर स्थित ‘पोचमपल्ली ’ गाँव को ‘संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ’ (UNWTO) द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में से एक के रूप में चुना गया है।   ‘ पोचमपल्ली ’ आंध्र प्रदेश के नलगोंडा जिले में स्थित एक लोकप्रिय जगह है। कुछ लोग इसे भारत की सिल्क सिटी के रूप में भी बुलाते हैं, क्योंकि यहां देश की बेहतरीन गुणवत्ता वाली रेशम की साड़ियां बनाई जाती हैं। ...

सरोगेट ऐडवरटाइजिंग (Surrogate Advertising)

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सरोगेट ऐडवरटाइजिंग (Surrogate Advertising)   प्यारे साथियो नमस्कार, आप सभी रोज ही टीवी,रेडियो इत्यादि के माध्यम से सुनते आ रहे होंगे बोलो ज़ुबाँ केसरी …. दो उंगली उठाकर पान मसाले का प्रचार। बात यू तो अजय देवगन से शुरू हुई थी। शाहरुख खान तक पहुंची और फिर रणवीर सिंह और उसके बाद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार तक। बाकी सब तो ठीक है लेकिन जब बच्चन साहब और अक्षय कुमार ने इस पान मसाले का प्रचार किया तो लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से काफ़ी आपत्ति जताई। बाद में, बच्चन साहब ने सरोगेट ऐडवरटाइजिंग का हवाला देते हुए पान मसाला ब्रांड से कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया। अक्षय कुमार ने भी सोशल मीडिया पर माफ़ी मांगते हुए आगे से ऐसे प्रचार न करने का बात रखी   आप को बताते चले की सरोगेट ऐडवरटाइजिंग के ऐसे ही मामलों को देखते हुए अभी हाल ही में सरकार ने इस बारे में एक दिशा-निर्देश जारी किया है।   कुछ सवालों के साथ सरोगेट ऐडवर्टाइजमेंट को जानने का प्रयास करते है   सबसे पहला सवाल यह कि सरोगेट ऐडवर्टाइजमेंट होता क्या है? आपने अक्सर टीवी पर किसी शराब, तंबाकू या ऐसे ही...

संयुक्त परिवार*

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प्रिये साथियो नमस्कार, संयुक्त परिवार* Copy   *एक वो दौर था* जब पति, *अपनी भाभी को आवाज़ लगाकर* घर आने की खबर अपनी पत्नी को देता था । पत्नी की *छनकती पायल और खनकते कंगन* बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे ।   बाऊजी की बातों का.. *”हाँ बाऊजी"* *"जी बाऊजी"*' के अलावा दूसरा जवाब नही होता था ।   *आज बेटा बाप से बड़ा हो गया*, रिश्तों का केवल नाम रह गया*   ये *"समय-समय"* की नही, *"समझ-समझ"* की बात है   बीवी से तो दूर, बड़ो के सामने अपने बच्चों तक से बात नही करते थे *आज बड़े बैठे रहते हैं* *हम सिर्फ बीवी* से बात करते हैं!   दादाजी के कंधे तो मानो, पोतों-पोतियों के लिए आरक्षित होते थे, *काका* ही *भतीजों के दोस्त हुआ करते थे ।*   आज वही दादू - दादी *वृद्धाश्रम* की पहचान है, *चाचा - चाची* बस *रिश्तेदारों की सूची का नाम है ।*   बड़े पापा सभी का ख्याल रखते थे , अपने बेटे के लिए जो खिलौना खरीदा वैसा ही खिलौना परिवार के सभी बच्चों के लिए लाते थे ।   *'ताऊजी'* आज *सिर्फ...

बुद्धिजीवी

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  बुद्धिजीवी:   आइंस्टीन के जो ड्राइवर थे, उन्होंने एक दिन आइंस्टीन से कहा- " सर,आप हर सभा में जो भाषण देते हैं, वह मैंने याद कर लिया है।''   -आइंस्टीन हैरान रह गये!   फिर उन्होंने कहा, "ठीक है, मैं अगली बैठक में जहां जा रहा हूं, वे मुझे नहीं जानते, आप मेरे स्थान पर भाषण दीजिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।"   - ऐसे ही हुआ अगले दिन बैठक में ड्राइवर मंच पर चढ़ गये और ड्राइवर हूबहू आइंस्टीन की तरह भाषण देने लगा....   दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं. फिर वे यह सोचकर गाड़ी के पास आए कि ड्राइवर आइंस्टीन है।   - तभी एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा, ''सर, आपने जो कुछ भी कहा, क्या आप एक बार फिर संक्षेप में बताएंगे?''   - असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा !!   इस बार ड्राइवर पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वह हैरान रह गये....   ड्राइवर ने उत्तर दिया. -"क्या यह साधारण बात आपके दिमाग में नहीं आई?   मेरे ड्राइवर से पूछिए वह आपको समझाएंगे "   नोट : "यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद...

सामाजिक न्याय

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प्रिये साथियो नमस्कार , आज के लेख का विषय है " सामाजिक न्याय "  जिसे लिखने मे कुछ स्तरीय अख़बार एवं इंटरनेट सामग्री और पुस्तको से कुछ बिन्दुओ को शामिल करने का प्रयास किया गया है किसी भी प्रकार की त्रुटि हो तो आप सुधार हेतु सुझाव प्रेषित कर मार्गदर्शन करे ... सामाजिक न्याय की अवधारणा : प्रधानमंत्री के दूरदृष्टिकोण एवं भाजपा के व्यापक संगठन के साथ लोकसभा चुनाव से लेकर राज्य विधानसभा चुनाव मे भाजपा का विजयी रथ के गतिमान रहने का मूल कारण सामाजिक न्याय की अवधारणा को धरातल पर लाने से जुडा है हाल ही मे संपन्न हुए चुनाव परिणामो के पश्चात मुख्यमंत्रीयों की नियुक्ति प्रधानमंत्री जी की कूटनीति एवं दूरदर्शिता का परिचय प्रदर्शित करता है कि पार्टी ( भाजपा ) एक नये समावेशी समाजवाद कि और अग्रसर है भाजपा का ये समावेशी समाजवाद विपक्षी पार्टियों के तर्कों के विपरीत देश मे पिछड़े समाज के लोगो को विभिन्न आर्थिक एवं सामाजिक योजनाओं के तहत मुख्य धारा...