सामाजिक न्याय
प्रिये
साथियो नमस्कार,
आज के लेख का
विषय है "सामाजिक न्याय" जिसे
लिखने मे कुछ स्तरीय
अख़बार एवं इंटरनेट सामग्री
और पुस्तको से कुछ बिन्दुओ
को शामिल करने का प्रयास
किया गया है
किसी
भी प्रकार की त्रुटि हो
तो आप सुधार हेतु
सुझाव प्रेषित कर मार्गदर्शन करे...
सामाजिक
न्याय की अवधारणा:
प्रधानमंत्री
के दूरदृष्टिकोण एवं भाजपा के
व्यापक संगठन के साथ लोकसभा
चुनाव से लेकर राज्य
विधानसभा चुनाव मे भाजपा का
विजयी रथ के गतिमान
रहने का मूल कारण
सामाजिक न्याय की अवधारणा को
धरातल पर लाने से
जुडा है
हाल
ही मे संपन्न हुए
चुनाव परिणामो के पश्चात मुख्यमंत्रीयों
की नियुक्ति प्रधानमंत्री जी की कूटनीति
एवं दूरदर्शिता का परिचय प्रदर्शित
करता है कि पार्टी(भाजपा) एक नये समावेशी
समाजवाद कि और अग्रसर
है भाजपा का ये समावेशी
समाजवाद विपक्षी पार्टियों के तर्कों के
विपरीत देश मे पिछड़े
समाज के लोगो को
विभिन्न आर्थिक एवं सामाजिक योजनाओं
के तहत मुख्य धारा
मे ला रहा है
यहां देखना मेहत्वपूर्ण है कि बिहार
कि जाति जनगणना और
आर्थिक सर्वेक्षण के बाद विपक्षी
पार्टियां खासतौर पर कांग्रेस के
उच्च पदाधिकारियो द्वारा बनाये जा रहे जातिगत
समीकरण के जवाब मे
भाजपा(उच्च पदगण)ने
छत्तीसगढ़, मध्येप्रदेश और राजस्थान मे
क्रमशः विष्णुदेव साय, मोहन यादव
और भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री पद
पर आसीन कर ये
सन्देश दिया के पार्टी
समाज के सभी वर्गों
को बराबरी का हिस्सा देने
को प्रतिबद्ध है
अब थोड़ा पीछे चले
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी
जी ने स्वम पिछड़े
वर्ग के प्रतिनिधि के
रूप मे चुनाव लड़ा
था चुनाव परिणाम आने एवं प्रधानमंत्री
पद कि शपथ लेने
के बाद आर्थिक नीतियों
जैसे पप्रधानमंत्री जन धन योजना,
प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी
अनेक योजनाओं के माध्यम से
समाज के सभी वर्गों
को मुख्यधारा मे जोड़ने का
दूरगामी कदम उठाकर मजबूती
की नींव रखी थी|उसी समय राज्य
एवं स्थानीय इकाईयो मे 30से 50% आरक्षण
देकर समाज के हर
वर्ग को शामिल करते
हुए पार्टी को मजबूत करने
की और कदम बढ़ाया
इसी
क्रम मे देखे तो
द्रोपदी मुर्मू को प्रथम महिला
आदिवासी राष्टपति बनाने की बात हो
या जगदीश धनखड़ को उपराष्ट्रपति
बनाने की, ये सभी
कदम पार्टी (भाजपा) की समावेशी राजनीति
को इंगित करते है वही
2019 के चुनाव से पहले आर्थिक
रूप से पिछड़े स्वर्णो
को सरकार द्वारा 10%आरक्षण देने का कदम
भी सवर्णों को अपनी तरफ
बनाये रखने मे कारगर
साबित हुआ
मण्डल
आयोग की संस्तुतियों को
देखा जाये तो उत्तरप्रदेश
एवं बिहार जैसे राज्यों मे
क्षेत्रीय दलों के बढ़ते
वर्चस्व के कारण एवं
हिंदुत्व की राजनीति के
बावजूद भाजपा हाशिये पर आ चुकी
थी परन्तु उसने सभी वर्गों
को साधते हुए आगे की
राह कैसे बनाई यह
सब भी विमर्श का
विषय है
मुख्य
रूप से देखे तो
वर्ष 1990 मे मण्डल एवं
कमंडल की राजनीति ने
सही मायने मे लोकतान्त्रिक चुनाव
मे प्रतिनिधित्व का जो सफर
आरम्भ किया उसके कई
दूरगामी परिणाम मिले थे|मण्डल
की राजनीति से निकली पार्टियों
ने पिछड़े समुदाय से आने वाले
लोगो को राजनितिक एवं
कुछ हद तक आर्थिक
प्रतिनिधित्व देकर परिवर्तन जरूर
किये लेकिन 21वी सदी के
पहले दशक तक ये
स्पष्ट होने लगा के
ये सभी जाति एवं
परिवार विशेष की पार्टी बनकर
रह गई है, इसके
अलावा पिछड़े वर्गों के लोगो को
राजनीति अर्थवयवस्था एवं शेक्षणिक सेवाओं
मे प्रयाप्त अवसर ना मिल
पाने से ये लोग
कांग्रेस से भी दूर
होते गये जिसका फायदा
भाजपा को हुआ जिसने
अपनी रणनीति के माध्यम से
उन्हें अपनी और खींचा|
भाजपा ने पिछड़े वर्ग
के लोगो को पार्टी
के सम्मानित पदो पर प्रतिनिधित्व
देकर एवं सरकार मे
भागीदारी देकर इस समुदाय
के लोगो को एक
प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व देने का सफल
प्रयास किया जिसका परिणाम
था 2019 के लोकसभा चुनाव
मे 300 से अधिक उमीदवार
चुनाव जीते थे जिनमे
85 अन्य पिछड़ा वर्ग से आते
है
सामाजिक
दृष्टिकोण से सभी वर्गों
की मेहत्वकाक्षाओ को पूरा करते
हुए भाजपा ने अपने संगठन
मे जरूर बदलाव किये
है ये उसी का
परिणाम है के जिस
समय सामाजिक एवं जातिगत न्याय
की बात करने वाली
पार्टियां हासिये पर जा चुकी
है वही भाजपा नये
आयाम को लक्षित कर
पर रही है
निष्कर्ष
रूप मे सार को
समेकित कर मूल्यांकन करे
तो पाएंगे की अब समय
आ गया है की
तमाम विपक्षी पार्टिया भी स्वयं को
परिवारवादी एवं परम्परागत राजनीति
के दायरे से बाहर निकले
| राष्ट्रीय पार्टियों मुख्य रूप से कांग्रेस
को यह समझना होगा
की सामाजिक न्याय को केवल राजनितिक
नारा बनाने से काम नहीं
चलेगा,इसे धरातल पर
भी उतारना होगा जैसा की
भाजपा ने किया और
कर रही है भाजपा
यदि आज लोकसभा से
लेकर तमाम राज्य विधानसभा
चुनावों मे जीत दर्ज
करने मे सफल हो
रही है तो इसका
एक बड़ा कारण ये
भी है के वह
कांग्रेस पार्टी के ठीक विपरीत
सामाजिक न्याय की अवधारणा को
धरातल पर उतारने मे
कामयाब रही है
धन्यवाद
Comments
Post a Comment